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संगठन का लक्ष्य एवं उद्देश्य :

राज्य चुनाव आयोग, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243के और 243 ज़ेड ए के अंतर्गत, जिसे दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 के सैकशन 7 के साथ पढ़ा जाता है, यह प्रशासक दिल्ली द्वारा नियुक्त एक संवैधानिक प्राधिकरण है। राज्य चुनाव आयुक्त संघ राज्य क्षेत्र के संगत चुनाव कानून के अंतर्गत, संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ के लिए प्राधिकारी के रूप में प्रदर्शन करता है। अधीक्षण, निर्वाचक नामावलियों की तैयारी का दिशा नियंत्रण के लिए और सभी चुनाव तथा पंचायत का संचालन के लिए, राज्य निर्वाचन आयोग में अधिकारयुक्त करता है।

स्थापना का संक्षिप्त इतिहास और पृष्ठभूमि :

भारत के संविधान के 73वें और 74वें संशोधन के परिणामस्वरूप, सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्र में राज्य चुनाव आयोग गठित हुआ। दिल्ली राज्य चुनाव आयोग का गठन अक्टूबर 1993 में हुआ। वार्ड का परिसीमन 1991 की जनगणना के आधार पर किया गया था और 30-12-1993 पर प्रशासक दिल्ली के हस्ताक्षर के तहत आदेश जारी किये गये थे। सीटों के आरक्षण संम्बधित आदेश 24-03-1994 को एस.ई.सी. द्वारा जारी किया गया। कुल 134 वार्डों में से, 25 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थे जिसमें से 7 सीटें अनुसूचित जाति वर्ग संबंधित महिलाओं के लिए आरक्षित की गयी थी। शेष में से 109 सीटें अनुसूचित जाति वर्ग संबंधित महिलाओं के लिए आरक्षित की गयी थी। शेष 109 सीटों में से, संविधान के प्रावधान और डी.एम.सी. अधिनियम के अनुसार 37 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित थी। आयोग ने एमसीडी के लिए आम चुनाव को 24-02-97, और फिर 24-03-02 पर आयोजित किया। छह वार्डों के बाई-इलैक्शन जून 2004 में कारणात्मक रिक्तियों को भरने के लिए कराये गये।

जब से, आयोग क्षमता बँटवारे में उन कर्मचारियों, जिन्हें एमसीडी तथा दिल्ली सरकार से आहरण किया गया है, की मदद से कार्य कर रहा है। आयोग को मजबूत करने के लिए नियमित और कार्यात्मक आधार पर मार्च 2004 में विभिन्न श्रेणियों के 17 पदों को बनाया गया और अगस्त 2005 में 2 पदों को बनाया गया। जैसे ही भर्ती नियम अधिसूचित किये जाते हैं, अपने स्वयं के कुशल और विशेष रूप से स्थापित नियमों से आयोग द्वारा इन पदों को भरा जाता है।

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पृष्ठ अंतिम अद्यतन तिथि : 29-04-2022
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